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मैथिली ठाकुर के जीवन की कहानी ( Life Journey of Maithili Thakur)

मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को मधुबनी जिले के बेनीपट्टी गांव में हुआ था।  इनके पिता का नाम रमेश ठाकुर और माता का नाम भारती  ठाकुर था , इनके पिता रमेश जी मैथिली संगीतकार और संगीत अध्यापक थे , उन्होंने अपनी बच्ची का नाम माँ सीता जी के नाम पर मैथिली रखा , जो की उनकी मातृ भाषा का भी नाम था। 

मैथिली जी के दो भाई भी है , उनका नाम ऋषव और अयाची है। मैथिली जी ने अपनी प्राथमिक संगीत शिक्षा अपने दादा जी से और अपने पिता जी से प्राप्त किया।  

चार साल की उम्र से ही उनका संगीत सफर शुरू हो गया था, और उन्होंने हारमोनियम, तबला, एवं हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षण लिया। और मात्र 6 वर्ष की उम्र तक वो मैथिली फोक सॉन्ग , हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक , हारमोनियम और तबला वादन में दक्ष हो गयी।  

उनकी इस प्रतिभा को देखते हुए उनके पिता , उनको लेकर दिल्ली आ गए और यहाँ वो द्वारिका में रहने लगे।  

दिल्ली आकर उन्होंने एम् सी डी स्कूल में दाखिला लिया ,  संगीत में उनकी असाधारण प्रतिभा को देखकर उन्हें बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल में संगीत छात्रवृत्ति मिली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज से 2022 में बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की डिग्री पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ वह संगीत में भी सक्रिय रहीं।

maithili thakur
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मैथिली जी का करियर और उपलब्धियां

वर्ष 2011 में उन्होंने टेलीविजन शो " लिटिल चैम्प " में हिस्सा लिया , तत्पश्चात मैथिली ने कई संगीत रियलिटी शोज जैसे 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' और 'राइजिंग स्टार' में भाग लिया, जहां 2017 में वह पहली रनर-अप बनीं। उन्होंने लाखों दिलों में अपनी जगह बनाई और भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रदर्शन किया। 2021 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार' से नवाजा गया। मैथिली ने मधुबनी कला के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2016 में इन्होने " थारपा " नामक एल्बम से अपने संगीत को पेशेवर संगीत का रूप दिया , और फिर युटुब और इंस्टाग्राम पर भी सक्रीय हो गई। 

मैथिली जी का राजनीति में प्रवेश

2025 में मैथिली ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वॉइन की और बिहार के दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। राजनीति में उनका यह कदम उनकी शिक्षा और संगीत करियर के अनुभवों का संगम है, जो युवा और नए मतदाताओं के बीच अपनी अलग पहचान बना रहा है।


मैथिली ठाकुर अपनी संस्कृति, शिक्षा, संगीत और अब राजनीति के माध्यम से बिहार की समृद्ध विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा बताती है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता का समन्वय सफलता की कुंजी बन सकता है।​


मैथिली जी के द्वारा मधुबनी कला को बढ़ावा दिया जाना 

मैथिली ठाकुर ने मधुबनी कला को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो भारत के बिहार के मिथिला क्षेत्र में निहित एक पारंपरिक लोक कला है। वह अपनी संगीत यात्रा में इस जीवंत कला के तत्वों को रचनात्मक रूप से पिरोती हैं, और अक्सर इसके विषयों और रूपांकनों को अपनी प्रस्तुतियों में शामिल करती हैं। इस सम्मिश्रण के माध्यम से, वह न केवल अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति को समृद्ध करती हैं, बल्कि मधुबनी कला को व्यापक दर्शकों तक भी पहुँचाती हैं।

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