टाटा समूह के शिखर पुरुष एन. चंद्रशेखरन की प्रेरक कहानी

जब मेहनत, विज़न और निरंतरता एक साथ मिलते हैं, तो एक साधारण पृष्ठभूमि का इंसान भी देश के सबसे बड़े औद्योगिक साम्राज्य की बागडोर संभाल सकता है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने टाटा समूह (Tata Group) के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन (जिन्हें कॉर्पोरेट जगत में प्यार से 'चंद्रा' कहा जाता है) की यात्रा इसी बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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1. साधारण शुरुआत: गाँव से निकलकर कॉर्पोरेट दुनिया तक का सफर 

चंद्रशेखरन जी का जन्म तमिलनाडु के मोहनूर गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल में हुई। खेतों में काम करने से लेकर कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड साइंसेज और एनआईटी त्रिची (NIT Trichy) से एमसीए (MCA) करने तक का उनका सफर सीखने की ललक से भरा रहा।

> "सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपने शुरुआत कहाँ से की, बल्कि इस बात पर करती है कि आप सीखने के लिए कितने तैयार हैं।"

जन्म- 02-जून-1963 तमिलनाडु 

शिक्षा- एन आई टी त्रिची से एमसीए की डिग्री

परिवार-  

पत्नी- ललिता चंद्रशेखरन , बेटा - प्रणव 

सम्पत्ति- करीब 1250 करोड 

एन चंद्रशेखरन के पिता एस नटराजन पेशे से वकील थे, और मद्रास हाई कोर्ट मे प्रेक्टिस करते थे। 

कुछ समय बाद वो परिवार सहित गाँव आ गए, और गाँव मे खेती-बाडी करने लगे। गाँव मे उनके घर को लोग " वकील वीडुॅ" अर्थार्थ वकील का घर के नाम से पूकारा जाता था। एन. चंद्रशेखरन के कुल छह भाई-बहन है। स्कूल के दिनो मे वे क्रिकेट खेलते थे। अपने गांव के टीम मे वे ही कैप्टन बनते थे। एन।  चंरशेखरन जी का विवाह ललिता चंद्रशेखरन जी से हुआ , वो पेशे से इन्वेस्टमेंट बैंकर थी।  उनका परिवार मुंबई के पेडर रोड में रहता है , उनका एक बेटा प्रणव है। 

> 2. टीसीएस में एक इंटर्न से सीईओ तक का सफर

एमसीए के दौरान 1987 में 24 वर्ष की उम्र में चंद्रशेखरन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ गए। वर्ष 1987 में चंद्रा ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में एक साधारण सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर (इंटर्न) के रूप में कदम रखा था। अपनी तकनीकी सूझबूझ, ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और कठिन परिस्थितियों में शांत रहने की क्षमता के कारण वे लगातार आगे बढ़ते रहे।

 * साल 2009 में ऐतिहासिक मोड़: मात्र 46 वर्ष की उम्र में वे TCS के सीईओ और प्रबंध निदेशक (MD & CEO) बने।

 * वैश्विक पहचान: उनके नेतृत्व में टीसीएस न केवल भारत की सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी बनी, बल्कि इसने वैश्विक स्तर पर राजस्व और रोजगार सृजन के नए रिकॉर्ड बनाए।

3. टाटा संस की कमान: कठिन दौर में कुशल नेतृत्व

साल 2017 में जब टाटा समूह एक आंतरिक बदलाव और चुनौतियों के दौर से गुजर रहा था, तब रतन टाटा और टाटा ट्रस्ट्स ने समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) की कमान एन. चंद्रशेखरन को सौंपी।

वे टाटा परिवार के बाहर से इस पद पर पहुँचने वाले पहले गैर-पारसी पेशेवर चेयरमैन बने। उनके वयक्तित्व के बारे में हमें गहराई का हमें तब पता चलता है की टाटा समूह के चेयरमैन बनाने के पश्चात जब वो अपने गांव मोहनूर लौटे , तो गांव की तंग गलियों से गुजरते हुए , रास्ते  में मिलने वाले हर व्यक्ति से हाथ मिलाया , और उनका हाल पूछा।  इतने बड़े पद पर पहुंचने दे बाद भी उनकी यह विनम्रता बताती है कि वे जमीन से जुड़े व्यक्ति है।  उनके बारे में कहा जाता है कि  वे मीटिंग में मिलाने वाले लोगो को सालो बाद भी नाम और चेहरे  से पहचान जाते थे। 

4. चंद्रा की 3S रणनीति और नए युग का टाटा

चेयरमैन बनने के बाद चंद्रशेखरन ने पूरे टाटा समूह को पुनर्गठित करने के लिए 3S फ्रेमवर्क लागू किया:

 * Simplification (सरलीकरण): विभिन्न कंपनियों के जटिल व्यापार ढांचे को सरल और केंद्रित बनाया।

 * Synergy (तालमेल): समूह की अलग-अलग कंपनियों (जैसे टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टीसीएस) के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाया।

 * Scale (विस्तार): भविष्य के व्यवसायों में बड़े पैमाने पर निवेश किया।

टाटा समूह के भीतर उनकी छवि एक " Problem Solver" की रही। साइरस मिस्त्री के विवादस्पद निष्काशन के तुरंत बाद जब चंद्रशेखरन जी ने बागडोर संभाली तब टाटा समूह बोर्डरूम संकट से जूझ रहा था। उन्होंने न सिर्फ समूह को स्थिर किया , बल्कि बैलेंस शीट भी दुरस्त किया। 

उनके कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ:

 * एयर इंडिया की घर वापसी: वर्ष 2022 में 68 वर्षों के बाद एयर इंडिया का पुनः टाटा समूह में ऐतिहासिक अधिग्रहण कराया , करीब 68 वर्षो के पश्चात AIRINDIA टाटा घराने में वापस लोटी। 

 * इलेक्ट्रिक व्हीकल क्रांति: टाटा मोटर्स को भारत में ईवी क्रांति का अग्रणी ब्रांड बनाना।

 * भविष्य की तकनीक: सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में अरबों डॉलर का निवेश।

उनके चेयरमैन के कार्यकाल में समूह का कुल मार्केट कैप करीब 9.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़ कर 24 .4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया , लगभग ढाई गुना ज्यादा। 

चंद्रशेखरन जी ने अर्थशास्त्री रूपा पुरषोत्तम के साथ मिलकर 2019 में " ब्रिजिटल नेशन " नाम की किताब लिखी , जिसमे देश में रोजगार और तकनीक से जुडी चुनौतियां और उसे दूर करने के समाधान सुझाये गए है।  वे हमेशा मोब्लां  और वाटरमैन फाउंटेन पेन से नोट्स लिखते है। 

  •  वर्ष 2022 में भारत सरकार  ने देश के तीसरे बड़े सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया 
  • फ़्रांस सरकार ने वर्ष 2023 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान लीजन ऑफ़ ऑनर से सम्मानित किया। 
  • ब्रिटैन ने ऑनरेरी नाईट कमांडर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर की मानद उपाधि दी है। 

5. मैराथन धावक का माइंडसेट: जीवन और बिजनेस का मंत्र

एन. चंद्रशेखरन एक उत्साही मैराथन धावक (Marathon Runner) हैं। वे 40 की उम्र के बाद दौड़ना शुरू किए और दुनिया भर के कई प्रमुख मैराथन पूरे कर चुके हैं। वे वर्ष 2007 से मेराथन धावक रहे है , बोस्टन , शिकागो , बर्लिन , एमस्टडर्म , न्यूयार्क , टोक्यो और मुंबई जैसी बड़ी मैराथन में वो हिस्सा ले चुके है। 

वे अक्सर कहते हैं कि व्यापार भी एक मैराथन की तरह है, न कि 100 मीटर की दौड़। इसमें तत्काल परिणामों की जगह धैर्य, निरंतर अनुशासन और लंबी दूरी तय करने की ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष (Key Takeaway)

एन. चंद्रशेखरन की कहानी केवल कॉर्पोरेट कामयाबी का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हर उस युवा के लिए सबक है जो बड़े सपने देखता है। उनका जीवन सिखाता है कि ईमानदारी, विषय पर गहरी पकड़ और निरंतर मेहनत के दम पर आप किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं।


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