JVG Finance Limited - एक दर्दनाक अंत

जनवरी 1996 की बात है , वाराणसी के रथयात्रा चौराहे पर भारी भीड़ थी , पूरा चौराहा जाम था , चारो और 18 से 25 वर्ष के बीच के युवाओ का हुजूम लगा था , पूछने से पता चला की एक बहुत बड़ी और नई कंपनी में इंटरव्यू चल रहा है , उस कंपनी का नाम था JVG FINANCE LIMITED.

बाहर हजारो की भीड़ , सबके हाथ में उनके RESUME की कॉपी।  JVG के मेन गेट के सामने इंटरव्यू देने वालो की लाइन लगी थी।  एक -एक कर के सभी ऑफिस के अंदर जा रहे थे , और फिर कुछ देर के बाद बाहर  आ  रहे थे , अधिकांश का सिलेक्शन हो जा रहा था। 

यह उस समय के उभरते हुई कंपनी JVG  का जलवा था , हर कोई उसमे काम करने को उतावला था , लोग अपनी पुरानी कंपनी को छोड़ कर उसमे ज्वाइन करने के लिए आ रहे थे। 

यह कंपनी हालाँकि सिर्फ 6 वर्ष पुरानी थी , लेकिन उस समय था पुरे उत्तर भारत में इसका विस्तार हो चूका था , हर शहर में इसकी शाखाये थी। और धीरे -धीरे यह गली -गली में विस्तार करने लगी। 

JVG का आगाज 

1990 के दशक के दौरान भारत में कई ऐसी Non-Banking Financial Companies (NBFCs) उभरी , जिन्होंने आम लोगो को रातो -रात अमीर बनाने के सपने दिखाए।  उन्ही कंपनियों में से एक सबसे चर्चित और बड़ा नाम था  JVG Group, जिसकी प्रमुख कंपनी थी JVG Finance Limited

Vijay Kumar Sharma के द्वारा शुरू किये गए इस ग्रुप ने शुरुआत में ऐसी तेजी दिखाई की हर कोई हैरान रह गया।  लेकिन अंत में यह 1990 के दशक के सबसे बड़े वित्तीय घोटालो में से एक बनकर सामने आई। 

इसके अंत के साथ ही ना जाने कितने कार्यकर्ताओ के घर बर्बाद हो गए , कितने ही कार्यकर्ताओ ने आत्म - हत्या की , कितने ही कार्यकर्ताओ को सरेआम पीटा गया।  इसकी कहानी  गुमनाम अँधेरे में दफ़न हो गए। 

JVG Group की शुरुआत 

JVG Group की नींव Vijay Kumar Sharma (V.K. Sharma) ने रखी थी , कुछ लोग कहते है की उन्होंने अपने नाम के आधार पर इसका नाम रखा था , JVG (Jai Vaishno Gau Mata / Jai Vijay Giri) लेकिन मेरी जानकारी में उन्होंने इसका नाम अपने आध्यात्मिक गुरु के नाम पर रखा था। 

VIJAY KUMAR SHARMA जो की 1989 से पहले एक छोटे Contractor थे , बिल्डिंग में Construction Material की supply किया करते थे , और महीने में 2000 से 2500 तक कमा लेते थे। 

ये एक सामान्य ग्रेजुएट थे , जो कि इन्होने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय से 1978 में किया , फिर 1979 में Swadeshi Polytex में Material supply का कार्य करना शुरू किया। वर्ष 1985 से 1989 तक इन्होने कई और साइट पर मटेरिअल सप्लाई का कार्य शुरू कर दिया। और सितम्बर 1989 में इन्होने JVG Finance की नीव रखी। 

  • JVG की शुरुआत - 1989-1990 के दौर में विजय जी ने इसकी शुरुआत बिहार से छोटे पैमाने पर किया , शुरुआत उन्होंने रियल एस्टेट में निवेश के लिए फाइनेंस के उद्देश्य से किया। फिर इसी को आधार बना कर इसका पुरे भारत में विस्तार किया गया। अगले कुछ वर्षो में इन्होने कई छोटे -छोटे ग्रुप भी लांच कर दिए जिसमे प्रमुख थे - JVG Steel, JVG Department Store, JVG Foods, JVG Petrochemical etc.

  • मुख्यालय - शुरूआती सफलता के बाद विजय जी ने इस ग्रुप का headquarter दिल्ली में स्थापित किया। 
  • Vision: आम निवेशकों , विशेषकर लोअर और मिडिल क्लास से FIXED DEPOSIT और Recurring Deposit के रूप में पैसा इकठ्ठा करना , और अपने एजेंट को मोटा कमीशन देना , इनकी ग्रुप के विस्तार करने की मुख्य योजना थी। 

JVG CHAIRMAN


आकर्षक योजना और तेजी से विस्तार 

JVG Finance ने मार्किट में आते ही आम लोगो को आकर्षित करने के लिए बड़े -बड़े दावे किये और कई आकर्षित योजनाए शुरू की। 

  • भारी ब्याज दर - JVG उस समय बैंको की तुलना में 20 % से 30 % तक की अस्वभाविक ब्याज (interest) देने का वादा कर के लोगो से उनकी जमा पूंजी अपने यहाँ जमा करवाया , चुकि उन्होंने स्थानीय एजेंट को भर्ती किया हुआ था , और ये एजेंट भी काफी ज्यादा तादाद में भर्ती किये गए थे , इसलिए लोगो ने अपने जानकर , रिस्तेदारी देख कर इन एजेंट के आश्वाशन पर JVG में भरी निवेश किये , कइयों ने अपने सरकारी बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट को तोड़ कर JVG में निवेश किये। 
  • Agent Network: ग्रुप ने commission-based agents का एक विशाल नेटवर्क खड़ा किया , और उन्हें हर डिपाजिट पर मोटा कमीशन भी दिया , कुछ फिक्स्ड डिपाजिट के स्कीम पर उन्हें 25 % तक कमीशन दिया गया , रेकरिंग डिपाजिट पर सीधे 10 % कमीशन दिया गया।  यह इतना आकर्षित करने वाला था कि  एजेंटो ने सबसे पहले अपने घरो के डिपाजिट को JVG में डिपाजिट किया और फिर अपने रिस्तेदारो के पैसो को भी यहाँ डिपाजिट करवाया। 

  • Multi-Industry Diversification: विजय जी ने फाइनेंस से इकट्ठा किये गए पैसो को दूसरे व्यवसाय में भी लगाना शुरू किया , या वास्तव में लोगो को भ्रमित करने के लिए स्थापित किये गए थे , वो ग्रुप जिनकी उन्होंने चर्चा तो खूब की , लेकिन वास्तविक धरातल पर कभी नहीं रहे - 

    • JVG Departmental Stores: Retailing व्यवसाय के लिए 

    • JVG Airlines: Caribjet के साथ मिलकर domestic flights शुरू करने का सपना दिखाया .

    • JVG Publications: Media और  patrikaon में प्रोडक्शन की शुरुआत , कई शहरों में होल्डिंग लगे , ऑफिस खुले , लेकिन धरातल पर कभी नहीं आई। 

    • Hotels & Real Estate: जमीनों और प्रॉपर्टीज की खरीदारी , जो कि वह पहले भी करते थे , लेकिन ज्यादातर अपने पूर्णअधिन रूप में। 

    • Films & Entertainment: Bollywood projects में भी  investment किया , घोषणा भी की , जमीन पर कभी नहीं आई। 

JVG के पतन की शुरआत और RBI का शिकंजा 

1990 के दशक के आखिरी वर्षो में "JVG" का परचम लड़खड़ाने लगा, इनका पूरा बिजनेस मॉडल एक पूँजी स्कीम स्ट्रक्चर  रहा था , जहाँ पुराने निवेशकों को उनका ब्याज या मूलधन नए निवेशकों के पैसे से दिए जा रहे थे। 

  • 1997 मे RBI का शिकन्जा: Reserve Bank of India (RBI) और SEBI ने NBFCs पर नियम कडे करने शुरु कर दिया. प्रत्येक NBFC कम्पनी की गहरी जांच पड़ताल चालू कर दी गई। 

  • RBI Ban: October 1997 मे RBI ने JVG Finance को आम जनता से deposit लेने पर प्रतिबंध लगा दिया । यह कदम अदूरदर्शी कदम था, बिना सोचे समझे कि आम निवेशक, एजेंट और कार्य कर्ताओ पर इसका क्या असर होगा। वास्तव मे सरकार के इस कदम ने JVG के हेड विजय जी का मदद ही किया। जो कि उस समय उन निवेशको के भयानक दबाव का सामना कर रहे थे, जिनकी निवेश की मैच्योरिटी हो चूकी थी, पर JVG दे नही पा रही थी और निवेशक विजय जी पर दबाव बना रहे थे कि वह अपनी सम्पत्ति बेच कर उनका पैसा लौटाए।  लेकिन सरकार के बैन करने के कारण वह निवेशको के पैसे लौटाने से बच गए,  और फिर कभी भी वापस नही किए,  ना खुद और ना ही कोर्ट के द्वारा। 

  • Company Liquidation: June 1998 मे Delhi High Court ने JVG Finance Limited को liquidate (समाप्त) करने का आदेश दे दिया और official liquidator appoint कर दिए। और इधर JVG ने News paper मे एक विज्ञापन छपवाया, कि जिन निवेशको को अपने पैसे चाहिए वो ओरिजनल पास बुक लेकर दिल्ली स्थित हेड आफिस पर आ जाए,  वहा उनके कागजात के आधार पर उनके पैसे वापस कर दिए जायेगे।  पूरे भारत से हजारो निवेशक तय समय पर दिल्ली हेड आफिस पर पहुंचे । वहाॅ से उन सभी निवेशको को मानेसर भेजा गया।  और उनसे कहा गया कि आप लोग काफी तादाद मे आये है, इसलिए सबके पासबुक की रिसिविन्ग देना संभव नही है, आप लोग अपने ओरिजनल पेपर एक खाली जगह है, वहा पर रख कर चले जाइए, और हम आपका पैसा आपको वापस कर देंगे। वह खाली जगह एक ईलेक्ट्रीक भट्टी थी। फिर कम्पनी के ही कुछ लोगो ने अपने पेपर उसमे फेंकने चालू किए, उनकी देखा-देखी अन्य भोली-भाली जनता ने भी अपने जमा किए गए पैसो के मूल कागजात को उस आग के भट्टी के हवाले कर दिया। 

  • अब JVG से मागने वाले कम लोग बचे, और उनको भी अदालत के कार्यवाही मे फसा कर इतना विलंब किया गया कि लोगो ने उम्मीद छोड दिए।  कितने निवेशको के पैसो को ऐजेन्टो ने अपनी जमीन या घर बेच कर चुकता किया।  कुछ आगे जीवन भर अपनी कमाई का कुछ रकम धीरे-धीरे निवेशको को लौटाए, क्योकि ये उन एजेंट के अपने ही लोग थे।

  • इसतरह सरकार के मिलीभगत और सहयोग से विजय जी निवेशको को उनके जमा किए गए रकम को वापस करने से बच गये।

  Kanooni कार्रवाही और घोटालो का असर

  • Arrest और Cases: V.K. Sharma और group के अन्य directors के खिलाफ CBI, police और regulatory bodies द्वारा fraud, cheating और criminal conspiracy के सेंकड़ों cases दर्ज किए गये. उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया,  और लंबे समय तक jail मे रहना प़डा. इस तरह सरकार ने उनको बचा लिया, क्यो कि यदि वह उन दिनो बाहर रहते तो पब्लिक उन्हे दण्ड जरूर देती।

  • घोटालों की राशी: अनुमान के मुताबिक़, लाखो आम निवेशको के लगभग ₹800 करोड़ से ₹1,000 करोड़ से अधिक रुपये डूब गए. यह 1997 की रकम है, और यदि आज की डेट की इसकी वैल्यू निकाली जाए,  तो यह भारत वर्ष के सबसे बड़ घोटालो मे से एक होगी।

  • Court Proceedings: Delhi High Court और special courts मे JVG की properties को बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाने की कानूनी प्रक्रिया दशकों तक चलती रही. इसके बावजूद किसी भी निवेशक का पैसा नही लौटाया गया।

इस कहानी से सबक 

JVG Finance का मामला यह सिखाता है कि बिना किसी ठोस revenue model के, अस्वाभाविक हाई returns का वादा हमेशा जोखिम भरा होता है. किसी भी financial institution या NBFC मे निवेश करने से पहले उसकी regulatory approval (RBI/SEBI), financial stability औऱ business model की janch-partal करना बेहद zaroori है. यह लेख लेखक के निजी अनुभव और रिसर् पर आधारित है, यदि किसी पाठक का JVG से जुड़ा कोई घटना या सन्समरण है तो कृपया हमारे साथ शेयर करे, मुझे इस लेख मे उसे शामिल करने मे प्रसन्नता होगी। पुरे लेख को पढने के लिए आपको सादर धन्यवाद, आप अपने अनुभव कमेंट्स मे लिखे। 🙏 प्रणाम। 

RELATED LINKS - 

Comments

Popular posts from this blog

मैथिली ठाकुर के जीवन की कहानी ( Life Journey of Maithili Thakur)

पेमेंट गेटवे किसे कह्ते है? ( About Payment gateway Services)

मि. श्याम सुन्दर गोयनका जी Accounting Software के जनक ( Innovation of Accounting Software by Shyam Sunder Goyanka ji)